चर्चा के बिन्दु
अनुशासन का स्वरूप व महत्त्व
अनुशासन संगठन का प्राण है — उसी से शक्ति का निर्माण होता है। समूह + अनुशासन = संगठन। स्वच्छंदता (मनमानापन) को स्वतन्त्रता नहीं कहा जा सकता। अनुशासन प्रतिबन्ध नहीं है — यह तो बिना किसी भय या दबाव के, स्वयंस्फूर्त, ध्येय की प्राप्ति में सहयोग करने की स्वाभाविक वृत्ति है।
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