समता एवं नैमित्तिकानि
पुरसर्, प्रतिसर्, वामसर्, दक्षिणसर् (Directional Movements)
ये चार मूल दिशात्मक गतियाँ हैं जिनमें स्वयंसेवक दक्ष की स्थिति में रहते हुए आगे, पीछे, बायीं और दाहिनी दिशा में अनुशासित गति करते हैं।
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