दण्ड
द्विमुखी — द्विमुखी स्थिर (Two-Directional — Static)
द्विमुखी स्थिर अभ्यास वह तकनीक है जिसमें स्वयंसेवक एक ही स्थान पर खड़े रहते हुए दो विपरीत दिशाओं में — पहले और तीसरे मोहरे पर — शिरमार और अधोमार के प्रहार करता है।
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