चर्चा के बिन्दु
लोकशक्ति व राजशक्ति की तुलनात्मक विवेचना
"सरकार द्वारा ही सब काम होंगे" — यह सामान्य चिन्तन है। किन्तु राजसत्ता जितनी अधिक अधिकार युक्त उतनी ही निरंकुश व भ्रष्ट। जागृत लोकशक्ति के बिना समाज पूर्णतया राज्याश्रित हो जाता है — और राज्याश्रित समाज का अस्तित्व राज्य के साथ ही समाप्त हो जाता है।
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