चर्चा के बिन्दु
नित्य व नैमित्तिक कार्यक्रम
संघ यानि शाखा, शाखा यानि कार्यक्रम, कार्यक्रम यानि संस्कार। शाखा के कार्यक्रम दो प्रकार के होते हैं — नित्य कार्यक्रम और नैमित्तिक कार्यक्रम। दोनों मिलकर स्वयंसेवक में गुणों का क्रमिक विकास करते हैं।
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