चर्चा के बिन्दु
संघ कार्य ईश्वरीय कार्य है
संघ की प्रार्थना की छठी पंक्ति में हम नित्य प्रति कहते हैं — "त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्।" अर्थात् हे प्रभु! हम जो कार्य कर रहे हैं वह आपका ही कार्य है। संघ कार्य व्यक्तिगत स्वार्थ का नहीं — परमार्थ का, समाज हित का और ईश्वरीय संकल्प का कार्य है।
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