चर्चा के बिन्दु
संघ की रीति-नीति
जैसे हर कुल की अपनी परम्पराएँ होती हैं — वैसे ही संघ की भी कुछ परम्पराएँ निर्माण हुई हैं। इनको ही संघ की रीति-नीति कहा जाता है। परम्पराएँ नियम नहीं — फिर भी इनका संगठन के लिये नियमों से कम महत्व नहीं। इन्हें समझना तथा आगे बढ़ाना हमारा दायित्व है।
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