Baal Shakha

चर्चा के बिन्दु

स्वदेशी की संकल्पना और व्यवहार

15 अगस्त 1947 को जब देश स्वतन्त्र हुआ तब यह आशा बँधी थी कि अब हम विश्व में एक सुखी, सम्पन्न, समृद्ध और सुदृढ़ राष्ट्र के रूप में खड़े हो सकेंगे। किन्तु भारतीय अर्थव्यवस्था आज भी गहरे संकटों में फँसी है। इसका समाधान स्वदेशी दर्शन में है — जो "स्व" के साक्षात्कार और "स्वत्व" के जागरण की अवधारणा है।

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